श्री शिव चालीसा

॥दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ ॥चौपाई॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला।सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥१॥ भाल…

श्री गायत्री चालीसा

॥ दोहा ॥ ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड। शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड ॥ जगत जननी मङ्गल करनि गायत्री सुखधाम।…

श्री दुर्गा चालीसा

॥चौपाई॥ नमो नमो दुर्गे सुख करनी।नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥१॥ निराकार है ज्योति तुम्हारी।तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥२॥ शशि ललाट मुख महाविशाला।नेत्र लाल भृकुटि…